अफ़वाहों के दौर में कटती चुटिया और बीमार होता समाज



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दोस्तों पहले तो आपसे माफ़ी चाहूँगा मैं नियमित रूप से लिख नहीं पा रहा हूँ अपनी निजी व्यस्तताओं के कारण किंतु अब मैं वादा करता हूँ की नियमित आपको उचित तथ्य देता रहूँ ! कुछ जो रेगुलर हमारे दोस्त है उनके मेल मुझे प्राप्त हुए है मैं उनका भी जवाब जल्दी दूँगा और उनकी भेजी रचनाए भी पोस्ट करुंगा ! खैर अब आते है आज के रोचक तथ्य पर ! जैसा की शीर्षक में झलक रहा है पिछले कई दिनों से टीवी और अखबारों की सुर्खियों में ये चुटिया काट गैंग और कहीं चुटिया काटती चुड़ैल की घटनाएँ सर चढ़ कर बोल रही है ! लोग खास कर ग्रामीण तबका और अब तो कुछ शहरी भी इसे लेकर चिंतित और भयभीत है ! कई गांव वाले रात में कटती औरतों की चोटियों की रक्षा करने हेतु पहरेदारी कर रहे है ! उधर प्रधानमंत्री जी ने स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में लाल किले से अपने भाषण में 2022  तक न्यू इंडिया की नीव रखी जाने की बात कहीं ! ऐसे में  सवाल उठता है की जहां एक तरफ राजस्थान के बीकानेर जिले के एक छोटे गांव से फैली इस चुटिया काट की बात दिल्ली होती हुई देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश तक पहुंच गयी है ! ऐसे में 2022  में न्यू इंडिया की तस्वीर किस प्रकार होगी आप सोच सकते है  ! इस देश में मंकी मेन से लेकर दूध पीते गणपति और अचानक नमक की कमी की अफ़वाए कभी भी जोर पकड़ लेती है जिसे लोग उत्सव  मान कर बढ़ चढ़कर  हिस्सा लेते है और बाद में कोरी अफ़वाह निकलने पर अपने को ठगीत महसूस करते है ! कुछ वर्ष पूर्व झारखंड मैं बच्चा चोरी की घटनाएँ ऐसी जोर पकड़ी की हत्यारी भीड़ ने कई लोगो को मौत के घाट उतार दिया हाल ही की इस चुटिया काट घटना में आगरा के लोगो ने एक बूढ़ी औरत को शक के मद्देनज़र पिट पिट कर मार डाला ! किसी को सपने में कैंची दिखाई देती है  तो किसी को छत पर कौआ दिखाई देता है और अगली सुबह चुटिया कटी मिलती है ! ऐसे में सपने बेचकर कोई नेता इस देश पर राज़ करता है तो कोई हर्ज़ नहीं है ! खैर ऐसी अफ़वाहों के मायने क्या है? क्या ये खबरे समय समय पर लोगो की मानसिकता की जांच के लिए आयोजित की जाती है या कुछ मानसिक पीड़ा से ग्रसित लोगो द्वारा फैलाई जाती है ? आज इस लेख के माध्यम से सिलसिलेवार समझेंगे !

देश में आग की तरह फैली कुछ अफवाहें जिन्होंने खूब सुर्खियाँ बटोरी :

मंकी मेन की घटना : दोस्तों ये घटना साल 2001  की मई माह की घटना है  जो शुरू देश की राजधानी दिल्ली से सटे इलाके साहिबाबाद के श्याम पार्क से शुरू हुई और आग की तरह फैलती हुई दिल्ली और उसके आस पास के इलाके
गाज़ियाबाद और नोएडा तक पहुंच गयी ! लोग कई तरह की बात कहने लगे की एक बंदर की तरह दिखने वाला आदमी उन्हें डरा रहा है ! हाल तो यह हुआ की लोग अपनी परछाई में भी मंकी मेन देख रहे थे ऐसे मैं झुग्गी बस्तियों और कई कॉलोनियों में घर के बाहर अहाते और छत पर सोने वाले लोग भी रात जागकर निकालने लगे और बच्चे तो डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे ! खबर खबर फैलते फैलते मीडिया और पुलिस तक पहुंची ! कई लोगो ने अपने हिसाब से मंकी मेन की रूपरेखा को गढ़ा ! शुरूआती दौर में पुलिस के सामने दो मंकी मेन की खबर रखी गयी वहीँ लोगो के बढ़ते ख़ौफ़ के कारण आनन फानन में सरकार ने मंकी मेन को पकड़ने  पर  50000 का इनाम रख दिया ! कुछ लोगो ने अफ़वाहों की इसी जमती बर्फ में अपनी ख़ुराफ़ात का जौहर दिखाते हुए इसे बर्फ का गोला बनाते देर नहीं लगाई ! ऐसे में कुछ इलाकों की जगह कई इलाकों में वारदाते बढ़ती गयी ! पुलिस रात रात भर पहरा देती गयी और मीडिया जोर शोर से इसे ब्रेकिंग न्यूज़ दिखा कर चलाता रहा ! सरकार ने एक कमेटी का गठन  किया और वहीँ पुलिस ने अफ़वाहों को फैलाने वाले लोगो के खिलाफ सख़्ती बरती ! नतीज़न कुछ दिनों में घटनाएँ कम होती होती बंद हुई ! अंत में गठित की गयी कमेटी और पुलिस ने इसे महज़ कोरी अफ़वाह बताया !

दूध पीते गणेश जी की घटना : हमारे देश में विज्ञान से ज्यादा आस्था को तरजीह दी जाती है! ऐसे में समय समय पर कई जगहों पर चमत्कार के दावे किये जाते है और लोग इसे वास्तविक मानकर आधुनिकता के इस दौर में  विज्ञान को धता बता कर लाइन लगाकर देखने पहुंच जाते है तथा उन चमत्कार को आँखों के सामने होने का दावा करते है ! ऐसी ही एक घटना साल 1991  में बहुत चर्चित रही जहां कुछ जगह पर अचानक भगवान गणेश की मूर्तियां दूध पीने लगी और लोग लाइन लगा कर भगवान को दूध पिलाने पहुंचे ! कालांतर में ऐसी कई घटनाएँ एवं चमत्कार के किस्से बहुत मशहूर हुए है और लोगो ने इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है !

नमक के कमी की अफवाहें : हमारे देश  में समय समय पर नमक प्याज़ टमाटर आदि की कमियों की अफ़वाह फैला कर लोगो में हाहाकार मचाया जाता है और लोग ये सुनकर उचित दाम से कई गुना ज्यादा दाम में चीज़ो को ख़रीद ले आते है ! अभी कुछ महीनों पहले ही नमक की कमी की अफ़वाह उत्तरप्रदेश से होती हुई आग की तरह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक पहुंच गई ! लोगो ने तुरंत दुकानों की तरफ दौड़ लगाई और दुकानदारों ने भी अफ़वाह का पूरा फायदा उठाते हुए  नमक को 200  से 400  रूपये किलो तक बेचा ! प्रशासन ने सब अफ़वाह को बेकार करार दिया लेकिन तब तक  लोग बेवकूफ़ बन चुके थे !  

चुटिया काटती चुड़ैल की अफवाहें : हाल की घटना जिसकी शुरुआत 6  जुलाई को राजस्थान के बीकानेर जिले के एक छोटे गाँव से शुरू हुई और अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गयी है ! आये दिन किसी न किसी औरत की चोटी काटने की घटना सामने आ रही है ! अखबारों की सुर्खियाँ बनती ये खबरे आग की तरह फ़ैल रही है ! लोग एक बार फिर से दहशत और ख़ौफ़ में है !कई तरह की खबर आ रही है लोगो को रात में सपने में कैची दिखाई देती है अगले दिन उनकी चोटी कटी मिलती है ! किसी को मुंडेर पर  बैठा कौआ दिखाई देता है और बाद में उसकी भी चोटी कटी मिलती है ! लोग कई तरह के अफ़वाह फैला रहे है कोई तो ऐसे चुड़ैल कृत बता रहा है और कोई इसे गैंग से जोड़ दिए जा रहे है ! प्रशासन कुछ कर नहीं पा रहा है और मीडिया अपनी टीआरपि बढ़ाने में लगा है !

अफ़वाहों के फैलने के पीछे रोचक तथ्य :

मास हिस्टीरिआ : दरअसल मध्य काल में फ्रांस देश के एक शहर में कुछ नन एक समय पर एकत्रित होकर बिल्लियों की आवाज़ निकालने लगी धीरे धीरे कुछ और नन लोग शामिल हुई और सिलसिला बढ़ता गया ! उसके पश्चात एक अन्य जगह कुछ लोग अचानक नाचने शुरू हो गए धीरे धीरे कुछ और लोग इसमें शामिल होते गए !उनके नाचने का सिलसिला थम नहीं रहा था ! तब वहां के मेयर ने लोगो से कहाँ की इन लोगो को नाचने दिया जाए थक जाएंगे तो रुक जाएंगे किंतु कुछ और लोग भी इसमें जुड़े वे लगातार  नाचते रहे ! कुछ लोगो की मौत भी हो गयी काफी समय के बाद स्तिथि नियंत्रण में आयी ! दरअसल मनु चिकित्सक इसे मास हिस्टीरिअा से पीड़ित लोग बतलाते है ! मान लीजिये किसी मानसिक रूप से पीड़ित या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साथ कोई घटना घटती है तो पहले वो घटना से दूसरे लोगो को अवगत कराने में घबराता है फिर अगर यह बात अन्य लोगो तक पहुंच गयी तो कुछ लोग तो इसे नकार देते है किंतु समान मानसिक रूप से कमजोर लोग इस पर गौर  करना शुरू करते है ! धीरे धीरे वो चीज़े उन पर हावी होती है और वो इस तरह की गतिविधि में सम्मिलित हो जाते है ! बात धीरे धीरे फैलने लगती है और ये अधिक लोगो को प्रभावित कर देती है ! इसे मास हिस्टीरिअा कहते है ! संभवतया किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया मानसिक पीड़ित व्यक्ति पर कृत्य वो उस पर ऐसा असर करता है की वो कई लोगो को इसकी चपेट में ले लेता है !

पेड न्यूज़ :कुछ लोगो का ये भी मानना  होता है की कभी कभी कोई मामूली सी घटना को लेकर उसे इस तरह प्रचलित किया जाता है की लोग इससे भयभीत और आतंकित हो जाते है और इसे मानसिक रूप से पीड़ित लोग सकते में आ जाते है और इसमें शरारती तत्व अपने जौहर को प्रकट कर और भयभीत कर देते है ! वैसे इसे पेड न्यूज़ से इसलिए जोड़ा जा सकता है क्योंकि खबरे मामूली होती है लेकिन उन्हें बड़ा चढ़ा कर ऐसा प्रकट कर दिया जाता है की लोग इसके प्रभाव  में आ जाते है ! कुछ खबरे ऐसे भी है जैसे स्वाइन फ़्लू जितना प्रभावी नहीं था लेकिन इसकी अफवाहें फैला फैला कर और कमजोर कर दिया गया समाज को ! वैसे पश्चिम सभ्यता के देश भी इसे अछूते नहीं है लेकिन वहां के लोग अब जागरूक हो गए है किंतु भारत अभी भी रूढ़िवादी और अंधविश्वासी परंपरा पर जी रहा है इसलिए यहां लोग इससे भयभीत और आशंकित हमेशा रहेंगे !!

देखिये दोस्तों  अफ़वाह फैलाने वाले पर तो कार्यवाही हो सकती है किंतु इस अफ़वाह को उत्सव के रूप में मानकर शामिल होने वाले लोगो पर क्या कहा जाए ! अगर आप भी अगर किसी अफ़वाह में शरीक थे और अब अपने को आईने में देखकर मुर्ख  समझ रहे है तो समय रहते जागरूक बनिए और आने वाली अफ़वाहों से बचिए ! आपको ये लेख कैसा लगा नीचे अपने विचार कमेंट के माध्यम से अवश्य दें ! साथ ही इसे अन्य लोगो में शेयर कर हमारी मदद करें !!


Comments

  1. Bhut sundar lekh hai aapka !!

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  2. Behtreen Article ...Keep it up !!

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  3. Kya baat hai sir bhut mast likha hai aapne logo ko samjhne ki jarurat hai ..

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  4. Reality of our society

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  5. Bilkul correct aajkal log bewkoof ban rhe hai ..

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  6. Rohitash Prajapati24 August 2017 at 04:20

    bhut sahi vishay uthaya hai aapne

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  7. people will never change their mentality . we are so poor on that

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  8. Manish Khandelwal26 August 2017 at 04:21

    Vastvikta par karari chont ..

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  9. aap sabhi ka shukriya comment karne ke liye !!

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  10. Bhut sundar kataksh

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  11. अनुराग तिवारी29 August 2017 at 19:55

    बहुत ही बेहतर तरीके से समझाया आपने साधुवाद आपको

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  12. http://www.udaancontent.com/p/blog-page_7.html a cry from the broken heart.

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