हिंदी आत्म सम्मान की लड़ाई लड़ता : मूषक




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दोस्तों , भारत देश में विविधता है भाषा खान पान संस्कृति  की और यही हमारी एकता की पहचान है ! दरअसल ये वाक्य हमे घुट्टी की तरह पिलाये जाते है परन्तु इसका अनुसरण एवं प्रभाव गौण स्तिथि में नहीं रहता ! भारत ये सब समावेशी नियम कायदो से तो चल रहा है परन्तु  देश भक्ति , भाईचारा  एकता का पैमाना ये केवल टीवी डिबेट में , भारत पाकिस्तान के साथ तकरार में , और खतरे में आये हुए धरम की रक्षा में या नागरिक अधिकार के हनन के दौरान ही याद आता है ! वास्तव में देखा जाए तो मेरा देश उस पुरानी  एम्बेसेडर कार की माफ़िक़ हो गया है जिसमे चारो चक्के किसी और कंपनी के , दरवाज़े / स्टीरिंग सब सब अलग अलग कंपनी के और समय समय पर बदलते ड्राइवर , तरह तरह की  समावेशित सवारियो के बावजूद सबको ढोता हुआ आगे बढ़ रहा है ! बस मेंटेनेंस के नाम पर यह चाहता है की उसकी स्टीरिंग किसी अच्छे हाथों में हो एवं विदेशी कंपनियों के उसके पार्ट के बजाय स्वयं देश में विद्यमान पार्ट इस्तेमाल करें ! परन्तु सवारियों को  एक दूसरे से  लड़कर अपनी जगह को सुरक्षित कर अपने गंतव्य तक पहुंचना है न की उस वाहन का ध्यान रखना है जो उन्हें गंतव्य तक पहुंचा रहा ! ऐसे में ख़स्ता हाल में सारी सवारियों को ढोती मेरे देश की कार अपने आप का करुणा वंदन भी नहीं कर सकती I


आइये इस पैराग्राफ में आपको आसान भाषा में बतलाता हूँ I मेरे कहने का तात्पर्य यह है की दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र  देश भारत कहने को तो खुद का संविधान एवं आज़ादी का तमगा ओढे हुए है परन्तु बंधा आज भी पर गुलामी में है ; स्वयं की संस्कृति भाषा विविधता एकता अखंडता बस किताबों में पढ़ने मिलती है I हकीक़त में तो इनकी उपलब्धता काफी उपेक्षित है I आज मैं उसी मेरे देश की कार के एक पार्ट भाषा की बात कर रहा हूँ जिसकी जगह विदेशी भाषा ने ले रखी है ! देखिये यह ऐसी विरासत है देश की जो देश की राष्ट्रीय भाषा तो है परन्तु तिरस्कृत है ! दरअसल स्वदेशी उत्पाद  के इस्तेमाल के  लिए समय समय पर कुछ संगठन लड़ते नज़र आ जाते है परन्तु हिंदी भाषा का कोई ठेकेदार नहीं है जिसके कारण सब ज़रूरतों के हिसाब से इस्तेमाल तो करते है पर उसका मान सम्मान  और अपने परिवेश में समाहित करना अपने जीवन के स्टैंडर्ड के प्रतिकूल मानते है वहीँ  कुछ लेखक कवि पत्रकार एवं सामान्य मानवी गण जो हिंदी भाषा रूपी ज़मीन पर खेती तो करते है परन्तु बारिश रूपी आवश्यक मंच न मिलने के कारण हिंदी भाषा के ये पैरोकारी भी अपने आँखों के सामने अपनी ज़मीन को बंज़र होते देख रहे है !  ऐसे में हिंदी भाषा के आत्म सम्मान की लड़ाई लड़ने एवं इसकी जर्जर अवस्था को बचाने के लिए प्रयासरत  श्री अनुराग गौर एवं उनके साथियों ने एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो की हिंदी भाषा को सजग रूप में प्रचलित कर इसकी ओर आकर्षकता बनाए हुए है ! आज उसी हिंदी भाषा के लिए उपलब्ध मंच " मूषक " की समीक्षा करेंगे ! भारतीय ट्विटर " मूषक " कैसे काम करता है एवं उसकी उपयोगिता  क्या है ? इस लेख के माध्यम से समझते है !


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हमारे देश की विडम्बना यह की राष्ट्रीय भाषा होने के बावजूद नेता लोग संसद में भाषण अंग्रेज़ी में देते है परन्तु वही संवाद अगर लोगो के बीच आकर देना हो तो हिंदी की याद आ जाती है ! वहीँ अगर फिल्म के कलाकार अपनी निजी ज़िंदगी को छोड़ दे तो अपनी फिल्में हिंदी का उपयोग कर प्रदर्शित करते है ताकि कमाई हो सके ! ऐसे में हम जैसे सोशल मीडिया और इंटरनेट से घिरे लोग भी कुछ न आये तोह टूटी फूटी अंग्रेज़ी में ही सवांद का आदान प्रदान कर देते है ! हिंदी की इसी दोहरे मापदंड एवं अवेहलना के प्रति जागरूकता लाने हेतु अनुराग एवं उनके साथियों ने सोशल मीडिया पर एक क्रांतिकारी माध्यम तैयार किया जहां हर उम्र के लोग अपनी चहेती क्षेत्रीय भाषा में एक दूसरे से सवांद साध सकते है एवं एक दूसरे का अनुसरण कर सकते है ! सभी सोशल मीडिया के समाहित रूप को प्रदर्शित किया है जो काफी आसान माध्यम बन रहा है एवं भविष्य में हिंदी भाषा के पुनरुत्थान में मिल का पत्थर साबित होगा !


आप इसे मोबाइल एप्प के माध्यम से अपने मोबाइल में चला सकते है ! इस एप्प पर आप अपने सवांद लोगो तक पहुंचा सकते है ! एक दूसरे के अनुयायी एवं उनको अनुसरण कर सकते है ! साथ ही फोटो विडिओ भी शेयर कर सकते है ! ट्विटर की भांति मूषक पर भी आप सामयिकी घटनाओं ( करंट अफेयर्स ) , ट्रेडिंग टॉपिक पर अपने विचारों का आदान प्रदान कर सकते हो ! कुल मिलाकर सभी सोशल मीडिया का समावेश कर उसे क्षेत्रीय भाषा में इस्तेमाल आपको एक अलग अनुभव एवं आनंदायी अनुभव प्रदान करता है !


मुख्य प्रबंधक अनुराग  बताते है की  ये सत्य है  मूषक वहां नहीं है जहाँ इसे होना चाहिए था और हम इसे चलाने के लिए निवेशकों से निवेश भी प्राप्त नहीं कर पाएँ हैं । पर हमारा यकीन है कि जब आप कुछ भी सच्चे मन से करते हैं और आपके इरादे नेक हों तो विफलता कोई विकल्प नहीं होता , हाँ देरी ज़रूर हो सकती है और ये ईश्वर का आपके संकल्प को भाँपने का प्रयास होता है । आने वाले दिनों में हम आत्म मंथन करेंगे और अपनी ग़लतियों और ख़ामियों को एक एक कर दूर करने का प्रयास करेंगे । कितना समय लगेगा हमें नहीं पता पर करेंगे ज़रूर।


एप्प - मूषक ( गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद )


वेबसाइट -https://www.mooshak.in


उपयोगकर्ता -  50 हज़ार से अधिक


जरा सोचिये लगभग हमारे एक राजस्थान राज्य जितना इजराइल देश के लोग मध्य काल में घूम हुई इबरू भाषा को पुनर्जीवित कर अपनी राष्ट्रीय भाषा बना सकते है और दुनिया की अग्रिम पंक्ति में अपने  को खड़ा कर सकते है  तो इसी आधुनिक दौर में हम भारतीय क्यों न तकनीकी में विकास कर हमारी विरासत को संभालते हुए देश को उन्नति के पथ पर ले जाए ! इसलिए अधिक से अधिक लोग इस मिशन में जुड़ कर इसे एक क्रांतिकारी प्रयास बना दे !


दोस्तों आप मूषक एप्प को अवश्य इस्तेमाल करे एवं अधिक लोगो को जोड़े ! साथ ही अपने विचार कमेंट के माध्यम से अवश्य दे एवं हमारे पेज को सब्सक्राइब करें ताकि और अधिक रोचक जानकारियों से आपको अभिभूत करवा सकें !

Comments

  1. bohot sundar !!!

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  2. kya baat he ....pehli baar suna mushak ke baare me

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  3. Aapne bhut accha likha hai

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  4. Bhai likha badiya he .mushak k baare me jaankar accha laga

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  5. Tumne accha likha h bhau

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  6. Bhut sundar !!!

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  7. Process slow h bohot app kaa

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  8. aapne likha Bohot accha hai . maine apni kavita bheji hai use upload kab karenge ??

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    Replies
    1. Maafi chahta hu delay k liye .. jaldi hi upload karunga !!!!

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  9. shukriya comments k liye sabhi ko

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  10. Rohitash Prajapati3 August 2017 at 01:39

    Bhai tumne kya durdasha btaai hai hindi ki !! salaami aapko

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  11. बहुत सुंदर लेख
    धन्यवाद मूषक को अपने पाठकों तक पहुँचाने के लिए
    @प्रेरित

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  12. Paji tusi cha gye ho ..:0

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  13. अनुराग तिवारी9 August 2017 at 03:04

    भाई आपने क्या दर्शाया है देश की अवस्था को अति सुंदर

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  14. AApne Kamaal likha Hai Bhut sundar @sawan

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