जीवन के प्रति नज़रिया




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दोस्तों , अपनी निजी जीवन की व्यस्थताओ के कारण काफी समय पश्चात लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ I आज  आपके साथ बेहतरीन लेख को साझा करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरी करने हेतु मैं आज "जीवन के प्रति नज़रिया " नामक इस शीर्षक से एक सीरीज प्रस्तुत कर रहा हूँ I  इस सीरीज के माध्यम से आप जीवन के प्रति अपना  नज़रिया बदलने की कल्पना अवश्य करेंगे I आप लोगो ने जिंदगी पर उकेरे गए कई मार्मिक एवं प्रेरणा दायक लेख ,चित्रण देख अथवा सुन रखे है I  हर लेख एवं चित्रण का संदर्भ है की ज़िंदगी अनमोल है इसे व्यर्थ में न गवाइये एवं अपने उद्देश्यों की प्राप्ति करने में निरंतर प्रयासरत  रहिये I जीवन जीने के तरीके और खुद को उत्साहवर्धित  करने के तरीके तो हर कोई बताता है ऐसे लेखो, पुस्तकों एवं चित्रणों की भरमार है परन्तु कोई भी वास्तव में जीवन क्या है , हमे क्यों दिया गया है इसकी परिकल्पना में नहीं जाना चाहता I दरअसल मेरा यह लेख ज़िंदगी के प्रति एक ऐसी परिकल्पना है जिसमे आप यह सोचने पर अवश्य विवश हो जाएंगे की क्या सचमुच हम भगवान और शैतान द्वारा अपने मनोरंजन हेतु जारी खेल के महज़ एक प्यादे भर है या यूँ कहिये  अच्छाई और बुराई द्वारा रचित खेल के महज़ एक अदने से खिलाड़ी मात्र है I इस सीरीज के माध्यम से आप जीवन को नई दिशा में परिकल्पित कर अपने जीवन को आनंद पूर्ण बना सकते है I  आज इस सीरीज के प्रथम लेख में हम ये समझेंगे की किस तरह अच्छाई और बुराई के इस खेल में हम इंसानों को उलझा के रखा गया है ताकि हम जीवन के वास्तविक स्वरूप को कभी देख ही नहीं पाए I  


जीवन अच्छाई बुराई का खेल मात्र :


आप सभी जानते है की यह प्रकृति , जीव जंतु एवं जीवन ईश्वर  या किसी असीम शक्ति द्वारा प्रदत है और हम उन्ही के अधीन है I  यहां आप फ़र्ज़ कीजिये की जिस तरह हम बचपन में प्राकृतिक दृश्य का चित्र बनाते थे तथा  इसे हम सुन्दर और रचनात्मक बनाने हेतु पहाड़ ,नदी, पक्षी , जानवर इंसान एवं उसके घर को  अच्छे से दर्शाते थे I ठीक उसी प्रकार ईश्वर ने ही अपने मनोरंजन हेतु इस प्रकृति एवं जीव जन्तुओ का निर्माण किया है I ईश्वर ने अपनी रचनात्मक सोच में इज़ात करते हुए समय समय पर बदलाव किये और अपनी अंतिम रचना के तौर पर इंसान को गढ़ा ! इंसान को धरती पर भेज उसमे प्रयोगात्मक रूप से क्रियान्वय किया फलस्वरूप इंसान में भाव उत्पन्न किये और उसे प्रकृति को समझने की इच्छाशक्ति एवं इसका उपयोग करने के लिए बुद्धिमता प्रदान की I ताकि वो इसे अच्छे तरह से उपयोग कर उस शक्ति का मनोरंजन कर सके पर यह सब ईश्वर को नीरस लग रहा था I फिर उसने और इंसानो की उत्पति का जरिया बनाया अब उसे मनोरंजन के अधिक साधन मिल गए परन्तु फिर भी उसने इंसानो के विकास को जारी रखा ! अंत में ईश्वर ने बुराई के भाव इंसान में पैदा किये ताकि संतुलन बनाया जा सके I  इंसान भी अब इन भावो एवं प्रकृति का लाभ उठाते हुए अपने आप को विकसित करता गया I  ज्यों ज्यों इंसान इन भावो में और सांसारिक मोहमाया में गहराता गया, त्यों त्यों इंसानों में आपसी कलह प्रतिस्पर्धा द्वेष रोष की भावनाएं बढ़ती गयी I  इंसानो को अपनी उपस्तिथि दर्शाने के लिए अपने कई रूप एवं अवतार को धरती पर भेजे लेकिन  इंसानो ने अपनी अपनी भावना के अनुसार ईश्वर के कॉपीराइट कर लिए ! इंसान ईश्वर की बनायीं हर चीज़ में गहराता जा रहा है और ये सोच को परे रख रहा है की वो मात्र ईश्वर के इस खेल का खिलाड़ी है जिसे हर हाल में अच्छा प्रदर्शन कर वापस उसकी दुनिया में लौटना है परन्तु इंसान सांसारिक मोह माया में इतना उलझा हुआ है की  ईश्वर के इस खेल में अच्छे राह को न अपना कर बुराई और अन्य भावो में लीन हुआ पड़ा है ! ईश्वर ने हर इंसान के खेल की एक समय सीमा तय कर रखी है ; निश्चित समय बाद उसे धरती से लौटना होता है ! जो ईश्वर के इस खेल को समझते है वो सांसारिक मोहमाया से त्याग देते है और वास्तविक ईश्वर की खोज मैं निकल पड़ते है  परन्तु ईश्वर भी यही चाहता है की मनुष्य इसी भावो में उलझा रहे ताकि इंसान उसके बनाये खेल के बारे में न जान सके ! इंसान ने खुद  को भौतिक सुख साधन में इतना उलझा दिया है की वो कभी जीवन का बोध भी नहीं कर पा रहा है ! इंसान कभी यह सोच नहीं पा रहा की निश्चित समय में उसे मात्र एक स्वाभाविक खेल खेलना है और इस दुनिया से रुखसत होना है , इसके उलट इंसान आपस में बैर रख कर , सांसारिक मोहमाया में उलझ कर और एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करके अपने आपको असल ज़िंदगी के खेल से कोसो दूर ले जा रहा है !


वैराग्य की स्तिथि :


जो जीवन के  इस खेल को समझ जाता है वो ईश्वर में एवं आध्यात्म की दिशा में अपने को मोड़ लेता है ! दरअसल  साधु फ़क़ीर अथवा पादरी बनकर ही वैरागी का भाव जाग्रत  नहीं होता अपितु ईश्वर भी यही चाहता है की आप उसके बनाये गए खेल को आनंद पूर्वक तरीके से खेले , ईश्वर द्वारा प्रदत्त हर चीज़ का भरपूर इस्तेमाल करे परन्तु उसमे डूब नहीं जाए क्योंकि अगर इसमें डूब जाएंगे तो आप स्वयं ही अपने में उलझ कर रह जाएंगे और जीवन के उद्देश्य को कभी समझ नहीं पाएंगे ! बस जीवन के खेल में अपना बेहतरीन प्रदर्शन करे और आंनदपूर्वक दुनिया से विदा हो !


जरा सोच कर देखिये की जब हम इस धरती पर आते है  तो हमारे पास कोई उद्देश्य नहीं होता  लेकिन जैसे जैसे हमारा विकास होता है , हम सांसारिक मोहमाया में रम जाते है जीवन को समझ ही नहीं पाते और एक दूसरे के प्रतियोगी बन जाते है ! यहाँ सोचने वाली बात है की हमे ईश्वर द्वारा प्रदत चीज़ो को माध्यम बना कर जीवन के खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करना है लेकिन हम मनुष्य आपस में खेल खेल कर ज़िंदगी के खेल को कोसो दूर ले कर जा रहे है !


 दोस्तों मेरी आपकी भावना को इसे ईश्वर का खेल बता कर  ठेस  पहुंचाना नहीं है ! आप जिस ईश्वर में विश्वास करते है उस पर अपनी प्रगाढ़ आस्था रखे और जीवन के इस खेल में ईश्वर के बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में साबित करें !

आप इस बारे में क्या सोचते है नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार अवश्य प्रकट करें साथ ही हमारे पेज को सब्सक्राइब क्र आने वाले नए लेखो की जानकारी प्राप्त करे तथा इस लेख को शेयर कर अपने प्रिय जन में अवश्य पहुँचाए !


Comments

  1. This is so refreshing.

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  2. i dont agree with this article 30% but other than that its good.

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    1. i cant say life is a game,or we were created just to be used as pawns.we have bigger purpose.

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    2. See he want to say that we are the players of God's Team and we have to Give Our best in given TIME and its our bigger purpose . I think nothing wrong in it ..

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  3. well Described !!

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  4. Bhai Jeevan ka saar bta diya aapne ..

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  5. Sir aapne wastav me sochne par majboor kar diya :0

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    1. bilkul sahi baat hai !

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  6. bas humko isi tarah rochak jaankari dete rahiye ... aap bohot accha likhte h

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  7. Senseless .. I Am Totally Disagree

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    1. Will you elaborate it please ??

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    2. Life is a gift ..not a game of god .

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  8. Rohitash Prajapati20 July 2017 at 23:55

    Philosophy :)

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  9. you have wonderful ideas with fresh content ..Keep it up

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  10. Brother tu to vairaagi nahi ban raha hai naa !!

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  11. Life is not just a game ..life god's gift to us ...

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  12. Thanks to all for the comments !!!!

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  13. Bhai Kuch Aur Naya Lekar Aao ..... Interesting

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