भारत का प्रतिबंधित आईलैंड ( द्वीप ) जहां लोगो को मार दिया जाता है





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दोस्तों दुनिया में बहुत से खूबसूरत आइलैंड है जहां हर कोई जाना चाहता है ! उसकी सुंदरता देखते ही बनती है ! अपने जीवन में हर कोई ऐसे सुन्दर आइलैंड और वहां बसी सभ्यता से अवगत होना चाहते है परन्तु वही दुनिया में कई ऐसे रहस्य्मयी द्वीप जो देखने में सुन्दर तो है परन्तु वहां जाने के नाम से भी लोग कापते है ! आज ऐसे ही एक द्वीप की बात करेंगे जो किसी और देश में नहीं अपितु हमारे भारत देश मैं ही है ! अन्य द्वीपों की तरह ये देखने न शांत और सुन्दर है  परन्तु वहां जाना स्वयं अपनी मृत्यु को दावत देना है ! यहां किसी प्राकृतिक जीव या अन्य किसी से खतरा नहीं है अपितु वहां रहने वाले इंसानो से ही जीवन का खतरा है ! आज हम आपको ऐसे अनोखे लोगो के द्वीप से अवगत करवाना चाहते है जो आज भी पाषाण युग को अपनाए हुए है और उन्हें आज के इंसान से बैर है ! वो किसी अन्य इंसान को अपने द्वीप पर देखना ही नहीं चाहते और अगर भूले भटके कोई उनके द्वीप पर पहुंच जाता है तो वापस लौटकर नहीं आता ! इसलिए भारत में शामिल होने के बावजूद  भारत सरकार ने इस द्वीप पर जाने से बैन लगा रखा है ! इस अनोखे द्वीप का नाम नार्थ सेंटिनल (प्रहरी) आइलैंड है जिसे मौत का द्वीप भी कहा जाता है ! यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है। यह द्वीप,भारतीय संघ राज्य क्षेत्र के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिले के अंतर्गत आता है ! यहाँ संसार की सबसे अनोखे सभ्यता के लोग पाए जाते है जो आज भी पाषाण युग के अनुसार जीवन यापन करते है ! आखिर इस सुन्दर द्वीप पर सरकार ने प्रतिबंध क्यों लगा रखा है? और इन लोगो को आधुनिक इंसान पर क्यों इतना गुस्सा है ? आइये इस लेख के माध्यम से समझने की कोशिश करते है !

सभ्यता एवं इतिहास :

नार्थ सेंटिनल आइलैंड पर बेहद ही रहस्य्मयी जनजाति रहती है ! माना जाता है की यह जनजाति 60,000  सालो से इस द्वीप पर रहती आयी है ! यह जनजाति की सभ्यता और जीवन शैली के बारे में आज तक किसी को भी पता नहीं चल पाया है ! यह जनजाति किसी बाहरी आदमी को अपने द्वीप पर कदम रखने नहीं देती है ! यहाँ पर पूर्व में गए लोग कभी वापस नहीं लौटे ! यहाँ के बारे में कई किस्से प्रचलित है जिससे ये आधुनिक भारत में मौत का द्वीप बना हुआ है ! मौजूदा दौर में इसकी वास्तविक स्तिथि का किसी को पता नहीं है ! हवाई सर्वेक्षण से अंदाजा लगाया जाता है की यहां के लोग किसी प्रकार की खेती नहीं करते है अपितु ये लोग  अपने आस पास के जीव जंतु और पेड़ पौधो पर निर्भर है ! इनकी वास्तविक जनसँख्या का पता नहीं लगाया जा सकता परन्तु एक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या कुछ दर्जन से लेकर 200 के आस पास हो सकती है !  ये जनजाति आज के युग में एक तरह से पाषाण कालीन सभ्यता का जीवन ही यापन कर रही है ! इन लोगो ने आधुनिक सभ्यता को पूरी तरह से नकार दिया है और दुनिया से इनका संपर्क शून्य है ! कहा जाता है की जब ये लोग दुनिया के किसी शख्स से मिलते है तो हिंसा के साथ ही मिलते है !आसमान में कम उचाई पर उड़ने वाले हवाई जहाज एवं हेलिकॉप्टर्स का ये तीर कमान और पत्थरो से स्वागत करते है !

वर्ष 2006  में गलती से इस द्वीप पर पहुंचने वाले मछुआरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था ! इससे पहले भी यह कई बार हिंसा कर चुके है ! कई रिपोर्टो में इसे सबसे संसार की सबसे अलग थलग रहने वाली जाती करार दिया गया है ! इन्हे लॉस्ट ट्राइब भी कहा जाता है ! इस आइलैंड के लोगो की ज़िन्दगी में भारत सरकार भी हस्तक्षेप नहीं करना चाहती ! भारत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले वाले इस आइलैंड के आदिवासी लोग आज भी अपने अनुसार जिंदगी जीते है ! यहाँ पर इन्हे किसी भी बाहरी इंसान की दखलंदाज़ी पसंद नहीं है !इनका मानव सभ्यता से कोई लेना देना नहीं है !

रिपोर्टो के अनुसार कुछ लोगो ने इस जनजाति के बारे में जानने की कोशिश की मगर स्थानीय लोगो ने उन्हें मार डाला ! किसी को भी उनकी भाषा ,रीतिरिवाज़ एवं जीवन शैली की भनक तक नहीं है ! यह जनजाति तीर कमान , पत्थरो और आग के गोले का प्रयोग इंसानो पर  करती है ! एक मुसफिर ने बताया की वर्ष 1981  में वो और उनके साथी गलती से इस द्वीप के करीब पहुंच गए थे और उन्होंने ने देखा के किनारे पर बहुत से लोग तीर कमान और पत्थर ले कर खड़े थे और करीब जाने पर  उन्होंने उन पर तीर और आग के गोले बरसाने चालू कर दिए ! बड़ी मुश्किल से वो और उनके साथी जान बचाकर वापस आये ! यही नहीं एक बार भूले भटके  से एक कैदी इस द्वीप पर पहुंच गया जिसे वहां के लोगो ने मार डाला !

अस्तित्व :

माना जाता है की 1980  के दशक में लोहे और अन्य धातु की खोज में जब कई लोग इस द्वीप की तरफ गए तब इंसानो और इन सभ्यता के लोगो के  बीच भीषण लड़ाई में इस सभ्यता के कई लोग मारे गए ! जिसके कारण इनका इंसानो के प्रति गुस्सा बढ़ता गया ! भारत सरकार ने वर्ष 1967  से 1991  के बीच यहां के लोगो को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कई बार संपर्क साधने की नाकाम कोशिशे की ! सर्वाइवल इंटरनेशनल नामक संस्था जो की विशेष कर आदिवासी जनजातियों पर शोध करती है ने बताया है की यह जनजाति दुनिया की सबसे अनोखी जनजाति इनमे बहार की संस्कृति और सभ्यता अपनाने की कमी है ! यही नहीं यहां के लोगो में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम है ! सामान्य बीमारी में भी इनकी मौत संभव है ! ऐसे में किसी महामारी में इनके अस्तित्व को खतरा है ! वर्ष 2004 में सुनामी में अंडमान के कई द्वीपों पर नुकसान हुआ था ! ऐसे में भारत सरकार ने यहां के लोगो भी खैरियत जानने के लिए सेना भेजी परन्तु यहां के लोगो ने सेना के हेलीकॉप्टर पर पथराव एवं तीर छोड़े! जिससे ये प्रयास भी नाकाम रहा ! वर्ष 2011में आयी एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय इस द्वीप पर मात्र 39 लोगो के ही जीवित रहने का अनुमान लगाया गया है !

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Comments

  1. Island of death looks beautiful and people look scary.

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  2. wonderful information .

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  3. i guess very few people know this ..keep it up the good work

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    1. Yup his work is very good.

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    2. i agree ..he is awsome

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    3. He definitely writes catchy information.

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    4. Rohitash Prajapati22 June 2017 at 22:34

      yeah but he knows how to play with words .I appreciate

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  4. i am big fan ..your page is good

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  5. nice.. good job

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  6. bhai accha likha hai

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