रविंद्र कौशिक (ब्लैक टाइगर ऑफ़ इंडिया )


दोस्तों , आप सभी ने भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के बारे में पढ़ अथवा  सुन रखा होगा ! रॉ का गठन  सन 1968  में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा  अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी  सीआईए की तर्ज़ पर किया गया  ! इससे पूर्व भारत लगातार दो युद्ध 1962  में चीन से तथा 1965  में पाकिस्तान से झेल चुका था ! रॉ का काम विभिन्न देशो में अपने जासूसों द्वारा वहां की ख़ुफ़िया जानकारी जुटाना एवं  भारत के खिलाफ होने वाले साज़िश को विफल करना है !
जासूस का जीवन खतरों से खाली नहीं होता ! उन्हें दुश्मन देशों में रह कर ख़ुफ़िया जानकारी जुटाना होता है और हर वक़्त मौत का सामना करना पड़ता है ! पकडे जाने पर देश उनको पहचाने से इंकार कर देता है और उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ती है ! जासूसो पर फिल्माई गयी फिल्मो में दिखाई गयी कहानी के उलट जासूसों का जीवन बहुत ही मुश्किल होता है ! आज भारत के उस जासूस के बारे में जानते है जिन्होंने भारत की सम्प्रभुता एवं अखंडता को बनाये रखने के लिए  पाकिस्तान जेल में कड़ी यातनाओ को झेलकर अपने प्राणो की आहुति दी परन्तु अपने देश की खुफिया जानकारी दुश्मन देश को नहीं दी !  रविंद्र कौशिक उर्फ़ ब्लैक टाइगर  को बहुत कम लोग ही जानते होंगे जिन्होंने पाकिस्तान में करीब 24  वर्ष रहकर कई अहम जानकारियों को भारत में पहुंचाया एवं पाकिस्तान की कई नापाक कोशिशों को नाकाम किया !
रविंद्र कौशिक का जन्म 11 अप्रैल 1952  को राजस्थान के श्री गंगानगर जिले में हुआ था ! रविंद्र कौशिक थिएटर आर्टिस्ट थे उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले नाटक लखनऊ  में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया I इस नाटक में रविंद्र एक भारतीय अफसर का रोल अदा कर रहे थे जिनको चीनी सेना ने पकड़ रखा था i  माना जाता है की इस कार्यक्रम में रॉ के अधिकारी भी सम्मिलित हुए थे जिन्होंने रविंद्र में जासूस बनने के गुण  देखकर उसे जासूस बनने का न्योता दिया !रविंद्र   को पाकिस्तान में अंडर कवर एजेंट बना कर भेजने के लिए करीब दो वर्षो तक दिल्ली में पाकिस्तान के बारे  में ; इस्लाम धर्म के बारे में ; तथा वह की परिस्थियों में रहने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी गयी !  इसके पश्चात सन 1975  में मात्र 23  वर्ष की आयु में उन्हें पाकिस्तान भेजा गया एवं उनका नाम नबी एहमद शाकिर दिया गया !

रविंद्र  ने वर्ष 1965 एवं 1971 मे पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों को करीब से देख रखा था ! उनमे देशभक्ति कूट कूट के भरी थी ; रविंद्र को पंजाबी भाषा का ज्ञान था चूँकि पाकिस्तान के कई शहरों में पंजाबी बोली जाती है तो उन्हे पाकिस्तान में सहजता से अपने  को मिला लिया ! पाकिस्तान में रहते हुए उन्होंने कराची यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री प्राप्त की ! उसके पश्चात  पाकिस्तान आर्मी में बतौर क्लर्क ज्वाइन किया तथा अपनी योग्यता को जाहिर करते हुए मिलिट्री अकाउंट में अफसर के रूप में पदस्थापित किया !  इसी दौरान  उन्होंने अमानत से शादी की उनका एक बेटा भी हुआ !
रविंद्र ने पकिस्तान सेना में रहते हुए सन 1979 -83  के बीच कई अहम जानकारीया भारतीय  सेना को पहुंचाई परन्तु पाकिस्तान सेना को इस बात की भनक भी नहीं लगने दी ! इसी जज्बे को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एवं उस समय के गृह मंत्री चव्हाण जी ने उन्हें '' ब्लैक टाइगर " की उपाधि से नवाज़ा !
बाद में भारत ने अपने एक और जासूस इनायत को सन 1983 को रविंद्र से मिलने  पाकिस्तान भेजा ! जो बदकिस्मती से पाकिस्तान की एजेंसी द्वारा पकड़ा गया ; कड़ी यातनाओ से गुजरने के पश्चात उसने रविंद्र के बारे में बताया ! बाद में पाकिस्तान सेना द्वारा रविंद्र को पकड़ लिया गया ! करीब दो वर्षो तक कड़ी यातना देने के पश्चात  उन्हें सन 1985  में फांसी की सजा सुनाई गयी !  पाकिस्तान  की सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह सजा आजीवन कारावास में बदल दी गयी ! उन्हें 16 साल तक सियालकोट, कोट लखपत और मियांवाली जेल सहित विभिन्न जेलों में रखा गया था। वहीं कौशिक को दमा और टीबी हो गया।
पाकिस्तान जेलो में उन्हें कड़ी यातनाए दी गयी ! उन्हें भारत की ख़ुफ़िया जानकारी मुहैया करवाने के बदले आज़ाद करने का प्रस्ताव दिया गया परन्तु इस देशभक्त ने कड़ी यातनाओ को भी सहकर अपनी देशभक्ति को अपने दिल में  संजोए रखा एवं टस से मस नहीं हुए  ! जेल में रहते हुए कई बार इन्होने जेल से भागने की कोशिश की वही भारत सरकार ने इस देशभक्त के प्रति अनदेखी की एवं  इन्हे पुनः  भारत लाने में कोई कोशिश नहीं की !  जेल में रहते हुए इन्होने अपने घरवालों को खत लिखे जिसमे अपने पर  हो रहे अत्याचारों एवं जुल्मो को बताया ! इनके परिवार ने सरकार से अपील की परन्तु सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की ! अंत में 26  जुलाई 1999  को  तपेदिक (टी बी ) एवं फेफड़ो की बीमारी से ग्रस्त होकर अपने प्राणो को त्याग दिया !
जेल में रहते हुए अपने अंतिम पत्र में उन्होंने लिखा की “भारत जैसे बड़े देश पर कुर्बान होने की यही सजा है अगर वे अमेरिका जैसे देश के जासूस होते तो कुछ दिनों में ही रिहा हो जाते !” माना जाता है की सन  2012 में बनाई गयी फिल्म  " एक था टाइगर " उन्ही के तर्ज़ पर बनाई गयी !
आज इस देशभक्त को बहुत कम ही लोग जानते है परन्तु इन्होने अपने प्राणो की आहुति देकर इस देश की सम्प्रभुता पर  कोई आंच नहीं आने दी ! आज भी इनके जैसे कई  देशभक्त भारत देश की सेवा एवं उसकी अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना सब कुछ अर्पण करने की भाव से निरंतर सेवा में लगे हुए!


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