आप का बिखरता कुनबा एवं भारत में नई राजनीति के उदय का पतन

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दोस्तों , आप यानि आम आदमी पार्टी एक ऐसी पार्टी जिसका उदय एक जन आंदोलन से हुआ ! इंडिया अगेंस्ट करप्शन  ( भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारत )  ऐसा  क्रांतिकारी जन आंदोलन था जिसे अपार जन समर्थन हासिल था ! सुप्रसिद्ध समाज सेवी  एवं गांधीवादी विचारधारा के अन्ना हज़ारे के नेत्तृत्व में जो की आमरण अनशन पर बैठे थे ! इनकी मांग भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कठोर जनलोकपाल बिल लाने  की थी ! इस आंदोलन में कई सामाजिक  लोग जैसे  मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल  , सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण , किरण बेदी , योगेंद्र यादव , कुमार विश्वास  संतोष हेगड़े , मनीष सिसोदिया , शज़िआ इल्मी इत्यादि शामिल थे !  इस  16 अगस्त 2011 से पुनः शुरू हुए  इस आंदोलन में करीब २ लाख लोग प्रतिदिन जंतर मंतर पर इकठ्ठा होते थे ! अपार जनसमर्थन से उस समय की मनमोहन सरकार को झुकना पड़ा  और संसद में जन लोकपाल के बिल को पेश किया गया ! परन्तु अन्ना हज़ारे और उनकी टीम को यह बिल नामंजूर था क्यूंकि उन्हें उनकी द्वारा दिए गए संशोधन का जिक्र नहीं था ! उन्होंने सरकार के इस बिल को लोगो को गुमराह करने वाला जोकपाल बिल बताया ! अरविन्द केजरीवाल ने लोगो से मिल रहे  अपार जनसमर्थन के बल पर राजनीति में आने का निर्णय किया परन्तु अन्ना हज़ारे इसके खिलाफ थे उनके विचार से राजनीति एक कीचड है फलस्वरूप  उन्होंने राजनीति में आने से मना कर दिया ! वही दूसरी और अरविन्द केजरीवाल ने अपने साथियो के साथ लोगो में स्वच्छ राजनीति का भरोसा देते हुए 26 नवंबर 2012  को आम आदमी पार्टी का गठन किया !


आम आदमी पार्टी का उदय :

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एक आंदोलन से निकली पार्टी आम आदमी के भरोसे को जीतने में सफल रही ! शुरुवात के दिनों में अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने कई बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया जिसमे सोनिया गांधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा के ज़मीन घोटालो का भी जिक्र था ! इसी कारण जनता में कांग्रेस पार्टी के प्रति रोष बढ़ता गया ! आम आदमी पार्टी को बढ़ते जनसमर्थन से कई पार्टियों को अपने विचारधारा से हटकर लोगो में विश्वास पैदा करने के लिए भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाना पड़ा ! उसी समय मुख्य विपक्ष भारतीय जनता पार्टी को भी आम आदमी से कड़ी टक्कर मिल रही थी !  उसी के परिणाम स्वरूप दिल्ली के विधान सभा में पहली बार किसी चुनाव के मैदान में उतरी आप को 70  विधान सभा सीटों में 28  सीट पर जीत हासिल हुई ! वही बीजेपी को 31  सीट मिली ! पहली बार आम  आदमी पार्टी  की सरकार दिल्ली में कांग्रेस की मदद से बनी एवं 28  दिसंबर 2013  को अरविन्द केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के पद की शपथ  ली !  देश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल ने मात्र  49 दिनों के बाद 14 फ़रवरी 2014 को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया।


इसके पश्चात आम आदमी पार्टी ने लोकसभा के चुनावो में 300 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे परन्तु आशा के अनुरूप लोगो ने बीजेपी के नरेंद्र मोदी पर विश्वास करते हुए उन्हें दिल्ली के सिहांसन पर पहुंचाया ! लोकसभा के चुनाव में आप को सिर्फ 4 सीट पंजाब से मिली !


लोकसभा में हार के पश्चात पुनः  दिल्ली में चल रहे पहली बार लगे राष्ट्रपति शासन के बीच आप  ने पूरा ध्यान   दिल्ली में होने वाले  आगामी विधान सभा चुनाव  पर लगाया ! जनता में विश्वास पैदा करने के लिए लोगो के घर घर जा कर अलख जगाई ! जनता में किये गए अपार वायदों के परिणाम स्वरुप एक बार पुनः  दिल्ली में हुए चुनावों में पार्टी को जनता का विश्वसनीय समर्थन मिला  जिसके फलस्वरूप 2015 में  दिल्ली के इतिहास में पहली बार आम आदमी पार्टी को 70  विधान सभा क्षेत्रों की सीटों में 67 सीटें हासिल हुई और एक बार पुनः अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की गद्दी मिली !


आंतरिक कलह आरोप एवं विघटन :


अपार संघर्षो के बीच एवं कई बार जनता के विरोध को झेल चुके अरविन्द केजरीवाल ने  पार्टी को बड़ी मजबूती के साथ संभाले रखा परन्तु पार्टी की आंतरिक मीटिंग्स में दूसरे कार्यकर्ताओ की ना सुनने एवं पार्टी में तानाशाही रवैये को अपनाने की बात कहते हुए एक एक कर के आंदोलन के प्रमुख साथी प्रशांत भूषण बाद में योगेंद्र यादव और शज़िआ इल्मी जैसे लोग पार्टी से निकलते गए ! हालाँकि पार्टी ने कई उपलब्धियो को जनता के बीच में रखा जैसे पानी बिजली के मूल्यो को आधा करना ,प्राइवेट स्कूलों में मैनेजमेंट कोटा खत्म करना ,  मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण करवाना , पर्यावरण प्रदुषण को काम कर ने के लिए ओड इवन का फार्मूला लाना और कई  हद तक इसे ज़मीनी हकीकत में उतारने में पार्टी काफी सफल भी रही है परन्तु बार बार केंद्र की सरकारों पर आरोप लगाना एवं पार्टी के कई मत्रियो पर गंभीर आरोप और स्टिंग ओपरेशन का सामने आना पार्टी की विश्वसनीयता को जनता के बीच खोता गया ! जिसके परिणाम स्वरुप ऐतिहासिक जीत के बाद भी पार्टी सिर्फ दिल्ली तक की पार्टी बन के रह गयी है अपितु दिल्ली में भी अपनी वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही है !


प्रमुख आरोप :


  • एक आंदोलन से उभरी पार्टी जो स्वयं को आम आदमी की पार्टी बता रही थी शुरुवात के दिनों में स्वच्छ राजनीती और नयी विचारधारा को लेकर चलने वाली पार्टी एक एक करके परम्परागत राजनितिक पार्टियों के नक़्शे कदम पर चलती गयी जैसे पार्टी में व्यक्तिवाद की परंपरा  आना , कई मंत्रियो के भ्र्ष्टाचार में लिप्त होना , झूठा हलफनामा देना  ,  पार्टी पर टिकट बेचने का आरोप सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग करना एवं  सरकार न चलने देने का केंद्र सरकार पर आरोप लगाना इत्यादि !
  • मत्रियो के संगीन आरोप जैसे मंत्री संदीप पर पोर्न व्यापार में संलिप्त होना वही सोमनाथ भर्ती द्वारा घरेलू हिंसा  में शामिल होना वही हाल ही मैं मंत्री सत्येंद्र जैन पर जमीन घोटाले का आरोप एवं गलत तरीके से सरकारी विभाग में बेटी की नियुक्ति लगे है !
  • हाल ही  में आयी शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट में आप पर सरकारी विभागों में असवैधानिक नियुक्ति , सरकारी भवनों का दुरूपयोग एवं  जनता के पैसो का अत्यधिक अपव्यय के गंभीर आरोप लगे है !
  • हाल ही  पार्टी के पूर्व  जल मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा अरविन्द केजरीवाल पर २ करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया एवं कई मंत्रियो के विदेशी दौरों पर अत्यधिक खर्च एवं टैंकर घोटाले जैसे संगीन आरोप लगाए गए है और उन्होंने पुराने कार्यकर्ताओ को आह्ववान करते हुए एक बार पुनः आप के खिलाफ जन आंदोलन की चेतावनी दी गयी है !


जनता में अविश्वास एवं असंतोष  :


केजरीवाल द्वारा भारतीय सेना की और से की गयी सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगना एवं गंभीर आरोपों  के  चलते जनता में अविश्वास एवं आक्रोश का कारण है ! जनता को किये अपार वादे एवं उसके उल्ट पुरानी पार्टियों के समान ही चलने वाली एवं भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध करवाई की मांग करने वाली पार्टी का खुद भ्र्ष्टाचार में शामिल होने से जनता अपने को ठगा महसूस करने लगी है !


स्वच्छ राजनीति की बात करने वाली आम आदमी  पार्टी को  मात्र कुछ ही वर्षो में शिखर तक पहुंचने वाली वही जनता अब उन्हें वापस अर्श पर ला रही है ! जिसका उदाहरण पांच राज्यों में हुए चुनाव में आप की शिकस्त एवं हाल ही में आये दिल्ली नगर निगम चुनावो के परिणाम से झलकता है !  लेकिन सोचने वाली बात है 10  साल से दिल्ली नगर निगम पर राज़ करने वाली भारतीय जनता पार्टी और भ्रष्टाचार के आरोप के बावजूद बड़ी विजय प्राप्त करती है ! ऐसे में जनता में विश्वास खोती आम आदमी पार्टी एवं जनता में असंतोष का  कारण बनती हुई ! जनता  पुनः परम्परागत विचारधाराओ को अपनाने वाली  पार्टियों की तरफ फिरसे जाती हुई अग्रसर दिख रही है ! वही ऐसे में कोई नई पार्टी नई राजनीती के माध्यम से अगर जनता के बीच में आएगी तो क्या जनता पुनः उस पर वही विश्वास दिखाएगी  जो उसने आप पर किया ! जानकार इसे  एक बार पुनः भारत में इसे नई राजनीती के उदय का अंत बता रहे है !


दोस्तों , अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर  कर अधिक लोगो तक पहुंचाने में मदद करे एवं कमेंट अवश्य करे !

Comments

  1. �� keep up the good work

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  2. Thanx for your kind words ...

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  3. WHAT ABOUT RIOTS?

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    1. all riots are created by politician by their dirty politics ..

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