भारतीय सीमाओं के अदृश्य रक्षक



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दोस्तों भारतीय सेना हर दम अपने प्राणो की आहुति देकर हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करने में मुस्तैद रहती है ! भारतीय सेना के इस अदम्य साहस  और  शौर्य के बदौलत ही आज हम अपने अपने घरो में अपने परिवारों के साथ मेहफ़ूज़ है ; आज हमारी देश की सीमाओं पर दुश्मन की पैनी नज़र टिकी रहती है परन्तु हमारे सरहद के प्रहरी सदैव अपने प्राणो का बलिदान देकर भी हमारी मातृभूमि की रक्षा  करने में तत्पर रहते है लेकिन आपको पता है इन् सैनिको के साथ हमारी कई अलौकिक एवं अदृश्य  शक्तिया भी हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करती है !  हमारे जवान इन्ही शक्तियों में अटूट आस्था रख , जोश जज्बे के साथ हमारी सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद रहते है ! आज हम उन्ही अलौकिक शक्तियों के बारे में जानेंगे जिनके भरोसे हमारे जवान अदम्य साहस का परिचय देते है और हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करते है !

एक देशभक्त आत्मा :

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एक सैनिक जिसकी मृत्यु वर्ष 1968  में हो गयी थी परन्तु आपको पता है वो अपनी मृत्यु के पश्चात भी अपनी देश की सीमा की रक्षा करता है ! सियाचिन (भारत -चीन सीमा रेखा ) समुन्द्र तल से 5000 मीटर ऊचाई पर जो की विश्व मैं सबसे ऊँची सीमा रेखा है जहां हमेशा तापमान शुन्य से नीचे रहता है ; हमारे जवान अपनी फौलादी ताकत से दुश्मनो से देश की रक्षा करते है ; वही उनका मानना है उनके शहीद साथी बाबा हरभजन सिंह जी भी उनके साथ रहकर हमारी सीमा की सुरक्षा करते है !जी हाँ दोस्तों हमारे देश के जवान ही नहीं अपितु चीन देश के सिपाही भी मानते है की बाबा हरभजन सिंह जी सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर हमारे देश की सीमा की रक्षा करते हैं !

बाबा हरभजन सिंह जी का जन्म 30 अगस्त 1946 को पंजाब के कपूरथला मैं हुआ था !  वर्ष 1967  में उनकी पहली पोस्टिंग सिक्किम मैं बतौर सिपाही हुई थी ! वर्ष 1968 मैं सियाचिन के नाथुला में  तैनाती के दौरान एक हादसे में उनकी मृत्यु हो गयी ! वे नाला पार करते हुए फिसलकर बह गए ! कड़ाके की ठण्ड एवं रात में उनके साथियो ने उन्हें बहुत ढूंढा परन्तु नहीं मिले फिर हादसे के दो दिन बाद वो उनके उनके साथी के सपने में आये और उनको बताया की उनका शव इस जगह पड़ा है ! अगली सुबह साथी के  निशानदेही पर उस जगह को  ढूंढा गया ! सब इस बात से हैरान थे क्यूंकि उनका शव और राइफल उसी जगह मिला ! सेना ने बाबा को भगौड़ा घोषित कर दिया था परन्तु इस भूल को सुधारा गया एवं ससम्मान उनको अंतिम विदाई दी गयी !

इसके पश्चात उनके साथियो के साथ कई घटनाऐ होने लगी मसलन कोई सिपाही ड्यूटी के वक्त सो रहा होता तो उसको थप्पड़ पड़ती थी ! बताया जाता है की वे उनके साथियो के साथ होने वाली घटनाओ को पहले ही बता देते ; कई साथियो के सपने मैं आकर बताने लगे की वो आज भी वही मौजूद है और अपनी देश की सीमा की रक्षा कर रहे है ! उनके साथियो ने इस बात को अपने अधिकारियो को बताया परन्तु अधिकारियो ने इसे मात्र अफवाह बताया ! फिर फ्लैग मीटिंग के दौरान चीन द्वारा कहा गया की आपका एक सैनिक रात मैं सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर सीमा के पास देखा गया है  कृपया इसे रोकिये ! भारत के सैनिको को ये बात अजीब लगी ! इसके पश्चात बाबा चीन के सैनिको के सपने आने लगे वही भारत के अधिकारी के सपने मैं भी आने लगे उनको बताने लगे की चीन अगले कुछ दिनों मैं घुसपैठ की तैयारी कर रहा है ! बाबा की बातें सच होने लगी ! तब भारत की सेना द्वारा यह मान लिया गया की बाबा वास्तव मैं उनके साथ है और अपनी ड्यूटी दे रहे है ! फिर भारतीय सेना ने उनका बंकर बनाया उनकी वर्दी राइफल को रखा जाने लगा रोज़ उनको खाना पानी परोसा जाने लगा ! भारत चीन की हर फ्लैग मीटिंग मैं उनके लिए अलग से कुर्सी रखी जाने लगी ! चीन भी उन्हें भारत का अभिन्न सिपाही मानने लगा ! बाबा को मृत्यु के बाद भी उनका सेना में काम देख कर उनके पद को जारी रखा !  बाबा हमेशा अपने साथियो पर आने वाली आपदाओं और चीन से होने वाली घुसपैठ के बारे मैं पहले से ही अवगत करा देते !  बाबा के प्रति सैनिको की आस्था को देखते हुए भारतीय सेना ने वह उनका भव्य मंदिर एवं बंकर का निर्माण किया ! धीरे धीरे उनकी प्रसिद्धि बढ़ने लगी ! लोग बड़ी संख्या मैं आने लगे ! मIनI जाता है की बाबा के मंदिर में एक बोतल पानी भर कर रखा जाता है तथा तीन दिन बाद उसे ले जाते है उस पानी को 21 दिनों तक थोड़ा थोड़ा कर पीने  से शरीर के रोग दूर होते है ! भारतीय सेना इस मंदिर का देखभाल करती है ! यह हज़ारो श्रद्धालुओं  की आस्था का केंद्र बना हुआ है !

बाबा को ससम्मान वर्ष 2006  मैं सेना से सेवा निवृति मिली ; वो मेजर के रूप मैं सेना से रिटायर हुए ! उनके निवास स्थान पर भी आज भी उनके कमरे को रोज़ सजाया जाता है ! आज भी रोज़मर्रा की चीज़े वहां रखी जाती है !  वहा कई श्रद्धालु पहुंचते है एवं  लोगो को लंगर भी  खिलाया जाता है ! भारतीय सेना आज भी सरहद पर उनकी उपस्थिति को मह्सूस करती है और उनके भरोसे एवं उनके साथ होने से उसी जज्बे के साथ सीमा की सुरक्षा मैं हर पल तैयार रहती है !

ओपी बाबा का मंदिर :

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बाबा हरभजन की ही तरह सियाचिन में तैनात भारतीय सैनिको मैं ओपी बाबा को लेकर प्रगाढ़ आस्था है ! 1980 के दशक में पाकिस्तान द्वारा सियाचिन में घुसपैठ की नाकाम कोशिश की गयी थी ! तब सियाचिन के उत्तर ग्लेशियर मैं मलऊन पोस्ट की फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात सिपाही ओमप्रकाश ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कई   सैनिको को मौत के  घाट उतार दिया परन्तु उनकी रहस्यमय तरीके से मृत्यु हो गयी परन्तु आज भी बर्फीली घाटियों में कोई सैनिक जब अपना रास्ता भटक जाता है तो ओपी बाबा उसे राह दिखते है ; यही नहीं अगर कभी बर्फीला तूफ़ान आने वाला होता है तो बाबा किसी ने किसी रूप मैं सैनिको को पूर्वानुभास करा देते है ! इसी कारण भारतीय सेना का ओपी बाबा मैं अटूट विश्वास है !

सेना के इसी विश्वास की कदर करते हुए वहाँ ओपी बाबा का मंदिर का निर्माण किया गया है ! बाबा के इस मंदिर में  सेना के  सिपाही सहित सेना के बड़े अधिकारी भी अपनी सियाचिन की तैनाती के दौरान मत्था टेकने जाते है ! जब भी सिपाही या अधिकारी पर्वतो पर ड्यूटी के पश्चात निचे घाटी मैं आते है तो इस मंदिर मैं सेना के नियम के अनुसार बाबा को रिपोर्ट करते है ! ओपी का मतलब सेना मैं ऑब्जरवेशन पोस्ट भी माना जाता है !इसी कारण ड्यूटी समाप्त होने पर बाबा के दरबार मैं हाज़री दी जाती है! भारतीय सेना का मानना है की बाबा आज भी उनके बीच में  है और सीमा की रक्षा करते है और सिपाहियों पर आने वाली आपदा को भी रोकते है !


युद्ध वाली देवी :

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आप सभी ने वर्ष 1971  के लोंगेवाला पोस्ट पर भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर बनी फिल्म बॉर्डर देखी होगी ! फिल्म के सीन मैं दर्शाया गया है की सुनील शेट्टी एक मंदिर को लेकर आश्वस्त है की दुश्मन देश कितने भी बम गिरा दे , माता के मंदिर को कुछ नहीं होगा ! यह सीन वास्तव में तनोट माता मंदिर पर फिल्माया  गया है !  वर्ष 1971 में जब पाकिस्तान एवं भारत का युद्ध हुआ तब लोंगेवाला पोस्ट पर भारत के मात्र 120  जवानो ने दुश्मन के  4000   का मुकाबला किया था ! तब भारत के पास कोई टैंक के कोई टैंक नहीं था परन्तु भारत के वीर जाबांजो ने दुश्मन के कई टैंको को ध्वस्त कर दिया और दुश्मनो के दांत खट्टे  कर दिए ! तब भारतीय सैनिको को माता के इस मंदिर में कड़ी आस्था थी माना जाता है इसी विश्वास के कारण माता के चमत्कार के कारण भारतीय सेना को इस युद्ध मैं विजय मिली ! माना जाता है की उस वक्त पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना पर करीब 3000 बम बरसाए थे परन्तु यह तनोट माता का ही चमत्कार ही था उसमे से एक बम भी नहीं फटा ! आज भी ये सभी बम तनोट माता के मंदिर परिसर पर जिन्दा रखे हुए ! माता के इसी चमत्कार से अभिभूत होकर भारतीय सेना का इस देवी के प्रति अगाढ़ श्रद्धा है ! आज जैसलमेर की सीमा पर स्थित  इस चमत्कारी  मंदिर पर लाखो श्रद्धालुओ का ताँता रहता है ! इस मंदिर की देखभाल का सम्पूर्ण जिम्मेदारी भारतीय सेना करती है ! माना जाता है आज ये युद्ध वाली देवी भारतीय  सीमा एवं जवानो की रक्षा करती है !


घंटियाली देवी माता मंदिर :


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घंटियाली देवी माता के मंदिर से पाक की सेना भी खौफ खाती है! माना जाता है की वर्ष1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध मैं पाक सेना बॉर्डर से 30 किमी अंदर जैसलमेर की सिमा से सटे बबियाँ गाँव के इस मंदिर में आ घुसी थी ! पाकिस्तान की सेना क 250जवानो ने यहां स्थित कुछ मूर्तियों को तोड़ दिया था ! तभी माना जाता है की माता एक बच्ची के रूप में आयी और उन्हें कहा की मुर्तिया तोडना पाप है ! इस पर पाकिस्तान के कुछ सैनिक सहमत हो गए परन्तु पाक सेना के कुछ अधिकारी और सैनिको ने कहा की हमारा मकसद हिन्दुस्तान को बर्बाद करना है ! हम सही कर रहे है माता के चमत्कार से पाकिस्तान के सैनिक मतीभ्र्म होकर आपस मैं लड़ने लगे ! सभी आपस मैं एक दूसरे पर गोलियां चलाने लगे ! इस प्रकार सारे 250 जवान आपस मैं अपने ही गोलियों से मारे गए ! बाद मैं भारतीय सेना का गश्ती दाल वहा पहुंचा तो वह उन्हें 250 पाक जवानो की लाश मिली! पाक सेना द्वारा दूसरी बार इस मंदिर पर हमला किया गया माता के आभूषण चुराने की कोशिश मैं पाक सैनिक अंधे हो गए ! आज भी माता के इस चमत्कार को मंदिर मैं संजोया गया है तथा पाकिस्तान द्वारा तोड़ी गयी मूर्तियों को रखा गया है ! माता के इस चमत्कार को देखकर भारतीय सेना का उनके प्रति आस्था बढ़ती गयी ! आज इस पुरे मंदिर का जिम्मा बी एस एफ (बॉर्डर सिक्योरिटी फाॅर्स ) ने उठाया है एवं कई  श्रद्धालु इस मंदिर में आते है जिनकी सुरक्षा   बी एस एफ करती है !



बाबा चमलियाल की दरगाह :-


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बाबा चमलियाल की दरगाह जम्मू के संIभा सेक्टर के रामगढ में  भारत पाक बॉर्डर से महज़ 50 गज़ की दुरी पर स्थित है ! बाबा न केवल हमारे सीमा के रक्षा करते है अपितु साम्प्रदायिक सौहार्द के भी प्रतीक है ! यहा हर साल लगने वाले मेले में  पाक सेना के रेंजर्स एवं अधिकारी भी शामिल होते है ! यह बाबा दिलीप सिंह बंता की समाधि है ! प्रति वर्ष होने वाले मेले में पाक सेना के कई लोग शामिल होते है एवं चादर चढ़ाते है ! यहा से टैंकरों मैं पानी एवं मिटटी ले जाते है ! माना जाता है की यह की मिटटी का लैप लगाने से चर्म रोग ठीक होते है ! हर साल इस उर्स के मौके पर पाक एवं भारतीय सेना गर्मजोशी से मिलते है एवं एक दूसरे का हाल पूछते है ! बाबा की ये दरगाह कई साल से इस साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाते आयी है !

भारत की सेना हर दम अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए तत्पर रहती है परन्तु कड़ी धुप सर्दी में भी इनका हौसला पस्त नहीं होता क्यूंकि इनके इस देशभाव को देख कर ही अलौकिक शक्तिया या भगवान या  खुदा भी उनकी रक्षा करता है ! निस्वार्थ भाव से अगर सेवा की जाए तो भगवान स्वयं आपकी रक्षा करता है!

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Comments

  1. I do not know about baba Harbhajan singh.. Your writing skill is awesome .

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