भारत के गौरव इसरो के कुछ रोचक तथ्य

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प्रस्तावना :


दोस्तों इसरो ( भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान केंद्र )  से आप सभी भलीभांति वाकिफ है !  अभी हाल ही में इसरो ने एक साथ 104 उपग्रहो को अंतरिक्ष की कक्षाओं में स्थापित किया ! ऐसा करने वाला पुरे विश्व में एक मात्र  अनुसन्धान केंद्र है ! इसरो बाकि संपन्न देशो के अंतरिक्ष अनुसन्धान केन्द्रो के मुकाबले काफी सस्ता है एवं काफी कारगर है !  इसरो ने सुपर पावर अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ) को भी पीछे छोड़ दिया है ! आज इस पोस्ट के माध्यम से आप इसरो के कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में जानेगे जिससे आपको भारत के इस गौरव पर नाज़ होगा !

सफरनामा  :



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इसरो की स्थापना  सन 1969  को स्वाधीनता दिवस के मौके पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान के जनक स्व.श्री विक्रम अम्बालाल साराभाई द्वारा किया गया ! विक्रम साराभाई का मानना था कि भारत को अगर दुनिया के देशो में  अग्रिम पंक्ति में रखना है तो इसे इस दिशा में  अपने कदम रखने होंगे ! इसरो पूर्वमें भारत के परमाणु विभाग के अंडर होता था ! जिसे साल 1969  में अलग संस्था के रूप से पहचान मिली !  शुरुवाती दिनों में इसरो के पास बहुत कम बजट हुआ करता था ! पहले उपग्रह प्रक्षेपण के दौरान इसरो के वैज्ञानिक तिरुअंनतपुरम से बसों में आते थे एवं रेलवे स्टेशन पर खाना खाते  थे ! 19  अप्रैल 1975  को पहला उपग्रह "आर्यभट्ट " रूस की मदद से  प्रक्षेपित किया गया ; जिसके कुछ हिस्से साइकिल से लाये गए थे ! वही  वर्ष  1981  में दूसरे उपग्रह "एप्पल " के प्रक्षेपण के दौरान कुछ हिस्से बैलगाड़ी से लाये गए ! आरम्भ में इसरो के पास खुद का लांच पैड़ भी नहीं था , वो नारियल के पेड़ को लांच  पैड़ के रूप में इस्तेमाल करते थे !  आज इसरो अमेरिका रूस चीन फ्रांस जापान समेत दुनिया के उन 6  देशो में शामिल है जो स्वयं के उपग्रह बना एवं प्रक्षेपित कर सकते है ! इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित  है एवं  देश भर में इसके 13  सेंटर है !  


कुछ रोचक तथ्य एवं अभूतपूर्व उपलब्धिया :-


  • इसरो का पहला स्वदेशी उपग्रह पी एस एल वी -3  था जिसके डायरेक्टर हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम आज़ाद थे !
  • इसरो ने अभी तक भारत के लिए 86  उपग्रह लांच करने के अलावा 21  देशो के 79  उपग्रह लांच किये है ! वही पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपरको( स्पेस & अपर अट्मॉसफियर रिसर्च कमिशन ) का गठन  इसरो बनने के 8  साल पूर्व साल 1961  में किया गया था ! इस एजेंसी ने अभी तक मात्र 2  उपग्रह प्रक्षेपित किये है वो भी दूसरे देशो की मदद से !
  • इसरो का बजट केंद्र सरकार के कुल खर्च का 0 .34 % है वही जी.डी.पी का मात्र 0 .08 % है  इसरो के पिछले 40 वर्षो का खर्च नासा के 1 साल के खर्च से भी आधा है ! वही नासा की इंटरनेट स्पीड 91gpbs परन्तु इसरो की मात्र 2gbps है !
  • वर्ष 2008 -09  में चंद्रयान मिशन लांच किया जिसका बजट 390  करोड़ था जो की नासा के  चाँद के मिशन से 10  गुना कम था ; इसी उपग्रह ने विश्व में सर्वप्रथम चाँद पर पानी की खोज की !
  • भारत अपने पहले ही प्रयास मैं मंगल गृह  पर पहुंचने वाला दुनिया का एकमात्र देश है ! अमेरिका ने 5  वे  प्रयास  रूस ने  8  वे प्रयास  में यह उपलब्धि हासिल की वही चीन व्  जापान भी अपने पहले प्रयास मैं असफल हुए थे !यह आजतक का सबसे सस्ता मिशन था ; जिसका बजट मात्र 430  करोड़ रूपये था  अर्थात  12  रूपये प्रति किलोमीटर जो की एक रिक्शा के किराये के बराबर था ! मंगल मिशन हॉलीवुड की कई मूवीज से भी सस्ता मिशन था !
  • साल 1999  में कारगिल युध्य के दौरान भारत ने अमेरिका से  अपने उपग्रह  की मदद से पहाड़ पर बैठे पाकिस्तानी सेनाओ का पता लगाने के लिए एवं ठिकाना   बताने के लिए मदद मांगी परन्तु अमेरिका ने मना कर दिया ! लेकिन अब भारत के इसरो ने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम आई आर ऐन ऐस ऐस ( नाविक ) लांच कर दिया ! अब हम बाकि देशो की तरह नेविगेशनल पर्पस के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं है ! वही इसरो ने गूगल अर्थ का देशी वर्शन "भुवन " बना लिया है जो पृथ्वी की 3 डी इमेज पहुंचा सकता है ! इसरो से डाटा खरीद सकते है एवं  एच डी चित्रों की जरुरत पड़ने पर इस अवसर का लाभ उठाया जा सकता है !
  • इसरो ने इसी वर्ष 15  फ़रवरी को 104  उपग्रह को प्रक्षेपित किया ! ऐसा करने वाला भारत दुनिया का एकलौता देश है ! पी ऐस ऐल  वी -37  राकेट से 101  विदेशी उपग्रहों एवं 3  देशी उपग्रह को छोड़ा गया ! इसमें जर्मनी कज़ाकिस्तान नीदरलैंड एवं अमेरिका के 88  उपग्रह सम्मिलित थे !  पूर्व में 20  जून 2016  को भारत इसरो के माध्यम से एक साथ 20  उपग्रह को प्रक्षेपित कर दुनिया का तीसरा देश बना था ! साल 2014  में रूस ने 37  उपग्रह तथा नासा ने साल 2013  में एक साथ 29  उपग्रह छोड़े थे !
  • इसरो में कई वैज्ञानिक समेत 17000  कर्मचारी कार्यरत है ! आपको ये जान के आश्चर्य होगा की इसरो के कई वैज्ञानिको ने शादी ना करके अपना सारा जीवन इसरो के प्रति समर्पित किया है ! एक के बाद एक सफलता से आप सोचते होंगे की इसरो के वैज्ञानिक कई बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी से पढ़ कर आते होंगे परन्तु हक़ीक़त में ज्यादातर काम करने वाले लोगो के पास बीएससी एवं एमएससी की सामान्य डिग्रीया है परन्तु हर दम नया  सीखने की चाहत और कड़ी लगन एवं मेहनत का नतीजा है !


आय का साधन :

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इसरो अंतरिक्ष बाजार में कमाई का बेताज बादशाह है !एंट्रिक्स इसरो की कमर्शियल डिवीज़न है ! यह हमारी स्पेस तकनीक को दूसरे देशो तक पहुँचती है ! इसरो का प्रक्षेपण का खर्च अन्य 5  देशो की तुलना काफी कम है तथा इसका सक्सेस रेट 100 % है ! इसरो ने अभी तक 200 से भी ज्यादा देशी एवं विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है ! बीते  5 सालो में इसरो ने 1000 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई की है ! माना जा रहा है की साल 2040 तक स्पेस का कारोबार 40 लाख करोड़ तक का होगा जिसमे 30 % का हिस्सा अकेला इसरो का होगा जिससे भारत देश की इकोनोमी को बहुत फायदा  होगा !


भविष्य के मिशन :


  • इसी वर्ष जून 2017  में इसरो एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने जा रहा है जिसमे की वो आजतक का सबसे ताकतवर रॉकेट " जी एस एल वी मार्क 3  " को लांच करेगा जिसमे 4  टन के कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ले जाने की क्षमता होगी !  अभी तक 2  टन के कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ले जाने के लिए यूरोपीय देशो पर निर्भर होना पड़ता था ! यह एक गेमचेंजर साबित होगा जो 36000  किलोमीटर की दुरी पर उपग्रह को अपनी कक्षा में स्थापित करेगा !
  • चंद्रयान-2  को चंद्रयान-1  की सफलता से उत्साहित होकर चाँद की धरती पर कुछ अन्य खोज के  लिए  साल 2018 में प्रक्षेपित किया जाएगा !
  • आदित्य मिशन- सूरज के बारे में कई सवालो की खोज के लिए जैसे सूरज के केंद्र में 6000 केल्विन की गर्मी है परन्तु बाहर के भाग में 20000 केल्विन से भी ज्यादा गर्मी है ; इसके लिए 2019-20 में इसे लांच किया जाएगा !
  • अंतरिक्ष में मानव भेजने की तैयारी में है जिसके लिए ऐसे यान का निर्माण किया जा रहा है जिसमे की पृथ्वी की कक्षा में 7 दिन तक रहा जा सके !

इसरो की इस  अविश्वसनीय सफलता एवं देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान के लिए प्रत्येक भारतीय को गर्व है !

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