60 के दशक का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान



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दोस्तों , आप सभी ने तेजस जो की सबसे हल्का लड़ाकू विमान है के बारे में सुना होगा जिसे  डी आर डी ओ (भारतीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन )  ने विकसित किया और हाल ही में इसे भारतीय वायु सेना में शामिल कर लिया गया है परन्तु आपको यह सुनकर आश्चर्य एवं गर्व भी होगा की  भारत ने अपना पहला स्वदेशी लड़ाकू बम वर्षक  (बॉम्बर)  विमान एच एफ -24  मारुत 60  के दशक में ही बना लिया था ! जी हाँ दोस्तों  1960  के दशक में भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान एच एफ -24  मारुत  सुपरसोनिक स्पीड वाला दुनिया के 5 पांच देशो के एयरक्राफ्ट में से एक था !  1971  में हुए   भारत पाकिस्तान युद्ध में जैसलमेर की लोंगेवाला पोस्ट पर भारत को विजय दिलाने में  मारुत ने अहम भूमिका निभाई थी !  दुनिया के बेहतरीन एयरक्राफ्ट  में से  एक  माने जाने वाले इस एयरक्राफ्ट को अपने सर्विस से पहले ही 1990  में रिटायर्ड क्यों कर दिया गया ! आइये जानते है एच एफ -24  मारुत के गौरव पूर्ण इतिहास के बारे में !

प्रमुख ब्यौरे ( लीडिंग पर्टिक्युलर्स ) :

  • लम्बाई - 15.87 मीटर  
  • विंग स्पान ( पंख चौड़ाई ) - 9 मीटर
  • कुल वजन - 10925  किलोग्राम
  • ईंधन क्षमता - 4772  लिटर्स       




प्रदर्शन  (पर्फॉर्मन्सेस )       
           
  • अधिकतम स्पीड - 1112 किलोमीटर प्रति घंटा  
  • चढ़ाई की दर ( रेट ऑफ़ क्लाइंब ) - 22  मीटर प्रति सेकंड
  • अधिकतम रेंज - 1445  किलोमीटर
  • अधिकतम सीमा  - 13650  मीटर

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दोस्तों मरुत एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है स्पिरिट  ऑफ़ द टेम्पेस्ट  अर्थात तूफ़ान की आत्मा है ! एच एफ  का  मतलब हिंदुस्तान फाइटर था ! एच एफ -24  (मारुत ) का डिज़ाइन जर्मनी के एयरोनॉटिकल इंजीनियर कुर्ट टैंक ने बनाया था ! इसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच ए एल ) ने विकसित किया था !  यह एशिया का पहला  जेट विमान था जो प्रोटोटाइप या टेस्ट फेज से गुजर कर एक्टिव सर्विस में आया एवं सफल उत्पादित हुआ ! मारुत को सर्वप्रथम 17  जून 1961  को उड़ाया गया एवं 1अप्रैल 1967 को इसका पहला उत्पादन भारतीय वायु सेना को सुपुर्द किया !   वर्ष  1954 से 1977 के बीच  एक सीट और दो टर्बो जेट इंजन (ऑर्फियस 703 )  वाले  मारुत एयरक्राफ्ट  147( जिसमे 18  ट्रेनर दो सीट वाले शामिल ) बनाए गए !

मारुत की अधिकतम क्षमता ध्वनि की स्पीड की दुगुनी  यानी 2   मैक  तक थी अर्थात 1960  के दशक में मारुत ने भारत को  विश्व के उन 5  देशो में शामिल कर लिया था जिसके पास  स्वदेशी सुपरसोनिक स्पीड के एयरक्राफ्ट थे ! मारुत ने वर्ष1965 एवं 1971 में हुए पाकिस्तान से युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी ! जिसके फलस्वरूप भारत को इन युद्धों में विजय हासिल हुई थी ! वर्ष 1971 के लोंगेवाले युद्ध में निर्णायक  भूमिका अदा की थी ! बाद में जिस पर बनी बॉर्डर फिल्म के आखरी दृश्य में इसे दर्शाया गया है !

ख़ामियाँ :

हालाँकि उस समय बहुत से देशो में नाईट विज़न उपकरण की तकनीक नहीं थी परन्तु इस शक्तिशाली एयरक्राफ्ट के असफल होने का प्रमुख  कारण इसका इंजन था जो की शक्तिशाली नहीं था जिसके कारण सुपरसोनिक स्पीड की क्षमता रखने वाला यह एयरक्राफ्ट सबसोनिक स्पीड ही प्राप्त कर पाता था !  माना  जाता है की  इस एयरक्राफ्ट के टर्बो जेट  ऑर्फियस इंजन ब्रिटेन ने दोयम दर्जे के  उपलब्ध  करवाए थे ! जिसका कारण था ब्रिटेन के खुद के पास भी इस तरह की डिज़ाइन वाले एयरक्राफ्ट नहीं थे !




भ्र्ष्टाचार एवं राजनीती का शिकार :

कई देश नहीं चाहते थे की भारत एक परमाणु संपन्न देश बने परन्तु हमारी साहसी देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1974 में परमाणु बम का परीक्षण कर विश्व ने यह बता दिया की भारत विश्व के किसी देश से कम नहीं है ! परन्तु इसके बाद भारत देश पर कई तरह के प्रतिबन्ध लग गए ! हालाँकि ये प्रतिबन्ध एयरक्राफ्ट खरीद फरोख्त  पर नहीं थे ! परन्तु  उस समय के चरम सीमा के भ्र्ष्टाचार एवं राजनीती के शिकार इस एयरक्राफ्ट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया !  भारत उस दौर में युद्ध के हथियारों को आयात करने वाला प्रमुख देश था !  इसी कारण अन्य  विदेशी कम्पनिया नहीं चाहती थी की भारत स्वदेशी तकनीक का इज़ात करे !  कुछ नामी एयरक्राफ्ट इंजन कंपनियों ने इसमें सुधiर की इच्छा प्रकट की परन्तु यह युद्धपोत भ्र्ष्ट राजनीती का शिकार हुआ ! इसकी अवहेलना  हुई फलस्वरूप यह बेहतरीन एयरक्राफ्ट अपनी सेवा समाप्ति के पूर्व में ही 1990  में भारतीय वायु सेना से रिटायर्ड कर दिया गया !

आज हम मेक इन इंडिया एवं स्वदेशी तकनीक के पथ पर अग्रसर है परन्तु   किसी भी युद्ध में क्षतिग्रस्त नहीं होने वाले  इस विमान में  अगर हम उन्नत किस्म का इंजन एवं एवियोनिक्स ( इलेक्ट्रिक उपकरण ) लगा लेते तो आज हम विमान को कई देशो को बेच सकते थे और स्वदेशी तकनीक के मामले में काफी सालो पहले ही आगे होते !

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Comments

  1. This post is so knowlegable.

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  2. THE PLANE LOOKS STUNNING

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  3. Yes it is! This picture is taken at Flugwerft Schleissheim Museum in Germany :)

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